Thursday, 19 October 2017

पंछी

सुनो!!
मुझे आदत नहीं
खटखटा कर जाऊं द्वार
किसीकी चौखट पर,
इसलिए
मैंने तुम्हारे दिल में ही
बसा लिया है अपना घर,
बाहर सिर्फ रोजी रोटी की व्यवस्था में
निकलना होता है
पंछी की तरह,
शाम को लौटना होता है अपने घर
अरमानों और सपनों की
परवरिश जो करनी होती है
क्योंकि जन्म दिया है तो जिम्मेदारी भी है
तुम्हारा साथ निभाना भी धर्म है मेरा
पर फिर भी
तुम समझते नहीं
अपने घर मे राज करती हूं
रानी बनकर।

प्रीति सुराना

Tuesday, 17 October 2017

शक मत करना

तुम कभी बेवजह मेरी नीयत पर शक मत करना
मैं तुम्हारे दिल में रहती हूं दिल चुराना मेरा काम नही

प्रीति सुराना

अंतस से अंत तक

तुम्हें पा लिया साथी
यही है खास जीवन में
तुम्हें बसा लिया मैंने
अंतस के आंगन में
मिले हो तुम नसीबों से
मेरे कर्मों का फल बनकर
आखरी सांस तक हो साथ
यही विश्वास है मन में,.... प्रीति सुराना

Monday, 16 October 2017

पर्दा

हमेशा दूसरों के सुख-दुख को
चर्चा का विषय बनाकर
अपनी कमजोरियों पर
पर्दा डालने वालों

काश !
कभी सोचा होता,

अगर कभी तुम्हारी जिंदगी के
रंगमंच का पर्दा
समय ने समय से पहले उठा दिया
तो क्या क्या छुपाओगे और कैसे??
प्रीति सुराना

मैं अब अधूरी नही हूं

सुनो!
तुमसे प्यार किया है
बिल्कुल सच्चा
संपूर्ण समर्पण के साथ
बिना किसी शर्त के
पर ये नही कहूंगी
कि
स्वार्थी नहीं हूं मैं
क्योंकि
है एक स्वार्थ
तुमसे प्यार करने में
वो है पूर्णता के अहसास का
और ये विश्वास
तुम्ही ने तो जगाया है
मैं अब अधूरी नही हूं
तुम्हें पाकर,..

प्रीति सुराना

मैं अब अधूरी नही हूं

सुनो!
तुमसे प्यार किया है
बिल्कुल सच्चा
संपूर्ण समर्पण के साथ
बिना किसी शर्त के
पर ये नही कहूंगी
कि
स्वार्थी नहीं हूं मैं
क्योंकि
है एक स्वार्थ
तुमसे प्यार करने में
वो है पूर्णता के अहसास का
और ये विश्वास
तुम्ही ने तो जगाया है
मैं अब अधूरी नही हूं
तुम्हें पाकर,..

प्रीति सुराना

Saturday, 14 October 2017

सीमाएं लांघ रही हूं

घुमड़ रहे भावों को कबसे थाम रही हूं
अधरों पर मुस्कानों के सेतु बांध रही हूं
भीतर ही भीतर बींध रहा है दर्द मुझे
हंसकर सहने की सीमाएं लांघ रही हूं

प्रीति सुराना

सह लोगे???

जाकर देखती हूँ दूर क्या तुम रह लोगे?
दिल की बातें किसी और से कह लोगे?
अगर मेरे यहां होने की जरूरत ही नहीं
तो क्या मेरे न होने की रिक्तता सह लोगे?

प्रीति सुराना

Wednesday, 11 October 2017

सफलता का अनिवार्य सूत्र

साथ का अर्थ है
न कोई आगे
न कोई पीछे
बल्कि
सब रहें साथ-साथ
डाले हाथों में हाथ
श्रृंखलाबद्ध,
और
कमजोर कड़ियों को
मजबूती से थामे
मजबूत कड़ियाँ...,

कम और ज्यादा
क्षमताओं के व्याकरण को
जगजाहिर करने की बजाए
जुड़कर क्षमताओं के
मजबूत और सटीक
समीकरण को जन्म देना,..
ताकि
एक का नहीं
सम्पूर्ण श्रृंखला का विकास हो
यही है सफलता का अटूट नियम,..

याद रहे ये कहावत
*अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता*
मंजिल तक पहुंचने के लिए
जरूरी है कदम बढ़ाना,..
और हाँ!
पर उससे भी बड़ा सच है
सोच से बढ़ता है सामर्थ्य

सफलता का अनिवार्य सूत्र है
सामर्थ्य बढ़ाने के लिए
कदमों के साथ हमे बढ़ाने होंगे
अपनी सोच के दायरे भी,..
क्योंकि
संकुचित मर्यादाओं में
घुट जाता है दम
हर सामर्थ्य और सफलता का,....

प्रीति सुराना

हमसफर

सुनो!
मैं खुश भी हूं
तुम्हारा साथ पाकर
मुझे दुख भी है
तुम पा सकते थे मुझसे बेहतर
मुझमें भर दिया आत्मविश्वास
मैं जी सकती हूं खुलकर
पर सच कहूं तो डर रही हूं
जी नहीं पाऊंगी
कभी तुम्हे खोकर
दुनिया के अजब से दस्तूर है
जो चलता है
उसे ही लगती है ठोकर
पर
मुझे इत्मिनान है
तुमने थामा है हाथ मेरा
नहीं लगेगी मुझे चोट गिरकर
क्योंकि गिरने से पहले थाम लेने का
तुममें हुनर है मेरे हमसफर,...

प्रीति सुराना

Sunday, 8 October 2017

चाहत

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता
जिसमें उम्र, जाती, धर्म,
पैसा, काम, परिवार नहीं
मायने रखता है व्यवहार,
अटूट विश्वास और प्यार
कह सकें दिल की बात
बिना ये कहे कि
किसी से कहना मत
और हो सके बिना द्वेष
दोस्त की खुशी में खुश
और दुख में मन आहत
आप और मैं निभाएं
ताउम्र ये रिश्ता ये चाहत,...

हैप्पी फ्रेंडशिप फॉरएवर चाची :)

Saturday, 7 October 2017

मरने से पहले

मैंने कभी नहीं चाहा
कि तुम आओ
समय की तरह
मेरी जिंदगी में
अच्छे या बुरे बनकर
और फिर छोड़ जाओ
अच्छी बुरी यादें देकर,..

न ही मैं ये चाहती हूं
कि तुम आओ
मेरी जरूरत,
सपनें, ख्वाहिश
या सुख-दुख बनकर
और खत्म हो जाओ
एक ही बार पूरे होकर,..

मैंने हमेशा यही चाहा
तुम जब भी आओ
आना बस जिंदगी बनकर,...
सुनो!!
मैं तुम्हें जीना चाहती हूँ
खोने और पाने के डर से परे
मरने से पहले,...जी भरकर,...

(एक खयाल
गीत
तुम पुकार लो, तुम्हारा इन्तज़ार है, 
मुक़्तसर सी बात है, तुम से प्यार है
सुनते हुए
बस यूँ ही,... 😊😔😌)

प्रीति सुराना