Friday, 25 May 2018

बैरन सी रातें

एकाकीपन मन पर छाया
बैरन सी रातें,
सूना सूना मन का आंगन
किसे कहूं बातें,

सुख-दुख के लेखे जोखे में
अधिक मिली पीड़ा,
पीर छुपाने का मुसकानों ने
उठा लिया बीड़ा,
सिरहाने टूटे सपनों की
रख ली सौगातें,...

एकाकीपन मन पर छाया
बैरन सी रातें,...

ढूंढ रही हूँ कोई मतलब
अपने होने का,
आज तड़प कुछ ज्यादा ही है
भय कुछ खोने का,
हर कोशिश की जो आंखों की
रोके बरसातें

एकाकीपन मन पर छाया
बैरन सी रातें,..

दूर गगन है तारों वाला
साथ नहीं कोई,
नींदे खोई, चैन गवांया
छुप छुप कर रोई,
जीवन के शतरंज में हरदम
पाई है मातें,...

एकाकीपन मन पर छाया
बैरन सी रातें,...

प्रीति सुराना




Thursday, 24 May 2018

सर्वस्व

तुम्हारा कुछ पलों का साथ
जन्मजन्मांतर के संबंधों सा लगता है,..
याद नहीं तुम कब आए जीवन में
याद नहीं कैसा संयोग था
जब मिले हम तुम
याद नहीं कौन सी परिस्थिति थी कि तुमने थाम लिया मेरा हाथ
याद नहीं कि मैंने कैसे दे दिया तुम्हारे हाथों में अपना जीवन
बस याद है सिर्फ इतना
ये बंधन मन से मन का
आत्मा से आत्मा का
अगर छूटा तो
शरीर से प्राण का छूट जाना तय है
हाँ
मैं रह जाती हूँ चुप
कई विषयों पर
पर इसलिए नहीं कि वो मेरी मूढ़ता या अज्ञानता है
हाँ
मैं बोल जाती हूँ कुछ ज्यादा ही कभी कभी आक्रोश में
या भय से आक्रान्तित होकर
पर इसलिए नहीं कि मैं जताना चाहती हूँ कि मैं समर्थ हूँ खुद में
*मेरा मौन और मेरी बातें*
दोनों ही परिणाम है
तुम पर मेरे उस विश्वास की तरह
जिसे नास्तिक अंधविश्वास कहते हैं
और
ईश्वर के भक्त
*आस्था*
मेरा प्रेम मेरी भक्ति
मेरा समर्पण मेर अस्था
मेरा सर्वस्व तुम,... प्रीति सुराना

हितकारी

यारी है उन फूलों से मेरी
सुख से भर देते जो क्यारी
बन कंटक जो पाठ पढ़ाते
मंजूर चुभन जो हितकारी

प्रीति सुराना

कोपलें

मौसम फिर से बदलेंगे,
नई कोपलें फिर फूटेंगी,
आज सहें चुभन कांटों की
कल फिर सुंदर सेज सजेंगी,.. प्रीति सुराना

Sunday, 20 May 2018

बेअसर

सुनो!

मेरे
जीने की
एकमात्र
वजह
हो

'सिर्फ तुम'

सौ दर्द
हज़ार मुसीबतें
लाख ठोकरें
तमाम टूटी ख्वाहिशें
अनगिनत आँसू

सब बेअसर

जब किसी पल
अचानक तुम
हर शिकवा भुलाकर
गले से लगाकर
सिर्फ इतना कह दो

मैं हूँ न!

प्रीति सुराना

Friday, 18 May 2018

मुक्ति

सुनो!
मुक्ति चाहती हूँ
हर दर्द से
बस इतना ही सोचा था
और
अचानक आकर
तुमने मुझे
सीने से लगा लिया।
बस एक ख़याल
और
कितना सुखद
ये पल
और
मेरे तुम,... प्रीति सुराना

वास्ते

इतनी नजदीकियां भी न बढ़ाइए
कि दूरियों को दर्द हो,...
सिर्फ नजदिकियों से रखोगे वास्ते
तो फिर दर्द जाएंगे किस रास्ते???

प्रीति सुराना

Thursday, 17 May 2018

कहन

वेदना, व्यथा, पीड़ा और दर्द
है सभी रिश्तेदार और भाई बहन।
दास्ताँ, अफ़साने, किस्से-कहानी
निकलते हैं एकदूजे का चोला पहन
क्या कहना, सुनना या समझाना
सब महसूस करने की बातें हैं
सिर्फ जुदा है कहीं भाषा-शिल्प
या कहीं विधा,शैली और कहन,.... प्रीति सुराना

Wednesday, 16 May 2018

शोर

हर वो ख्वाब
जिसने किया शोर
तोड़ दिया
हर बार
ज़माने ने,..
और तब से
आहिस्ता-आहिस्ता
मैंने डाल ली आदत
ख्वाबों को जीने की खामोशी से
जब तक वो पूरे न हो जाएं,..
अब
मेरे ख्वाबों, मेरी ख्वाहिशों
और मेरे मंजिल की ओर
बढ़ते कदमों की आवाज़
सिर्फ दिल की धड़कनों तक
पहुंचती है,..
सुनो!
देना साथ और करना दुआ
मेरे अपनों की खुशी से जुड़ा
कोई ख्वाब
कोई विश्वास न टूटे,...
मेरे हमराज़,
मेरे हमसफर,
मेरे तुम,..
सिर्फ तुम ही तो रहते हो
मेरे दिल में,...प्रीति सुराना

Sunday, 6 May 2018

संभालना खुद को मेरे बाद,..

सुनो!
जानती हूँ
नहीं होगा तुम्हे असर
भेड़िया आया की कहानी की तरह
यदि मैं कह दूं कि मुझे कुछ हो जाएगा
आज नासाज़ सी है तबीयत मेरी,..
और सच कहूँ
मैं चाहती भी यही हूँ
न हो तुम्हे कोई असर,...

हाँ!
तुम्हारी तकलीफ का अंदाज़ा
तुमसे कहीं ज्यादा है मुझे,..
क्योंकि
इन दिनों हो रहे
हादसों ने सिखाया
हम अपनों को खोकर
जीते हैं
डर-डर कर,...

क्योंकि
हादसों का असर
जाने वाले को नहीं होता
बल्कि होता सिर्फ
पीछे छूट रहे अपनों पर,...
मेरा अपनी तबीयत को लेकर
तुमसे बार-बार कहना
तैयार रखेगा मानसिक तौर पर
तुम्हें मेरे बाद संभलने के लिए,..

सच
मैं नहीं चाहती गुजर जाना
एक हादसे की तरह
क्योंकि नहीं चाहती
तुम्हें छोड़ना
डर और सदमे के साथ अकेला,
चाहती हूँ सिर्फ इतना
कि समझो जाना तय होता है,..

बस
अचानक जाना
अधूरी तैयारी के कारण
देता है सफर में
तकलीफें
पहले से पता हो
तो सफर होता है आसान
जाने वाले का भी
और छूट रहे अपनों का भी,...

मैं
इन दिनों
रोज सड़कों पर हो रहे
हादसों में से नहीं हूं
तुम समझना मुझे
मेरी बातों को
और
संभालना
खुद को मेरे बाद,..

प्रीति सुराना